जियोनी मैराथन एम5 प्लस का रिव्यू

चीन की हैंडसेट निर्माता कंपनी जियोनी ने खुद को नया अवतार देने की कोशिश की है। लोगो बदला गया है और अब कंपनी का टैगलाइन है, ‘मेक स्माइल्स’। यह बदलाव कंपनी के लिए बेहद ही अहम है। जियोनी मैराथन एम5 प्लस नए लोगो के साथ भारत में उपलब्ध कंपनी का पहला प्रोडक्ट है। इस स्मार्टफोन में भी कंपनी की मैराथन सीरीज की सबसे अहम खासियत को बरकरार रखा गया है। जी हां, हम बात कर रहे हैं बैटरी की। मज़ेदार बात यह है कि पिछले साल लॉन्च किए गए मैराथन एम5 का प्लस वेरिएंट होने के बावजूद इस हैंडसेट में छोटी बैटरी दी गई है। क्या जियोनी ने इस बार एम5 प्लस से जरिए सिर्फ बैटरी पर भरोसा ना करके कुछ नया करने की कोशिश की है? क्या मैराथन एम5 प्लस अपने प्रतिद्वद्वियों को पछाड़ने में कामयाब होगा? आइए जानते हैं।

लुक और डिजाइन
एम5 प्लस को दूर से देखने पर यह बेहद ही मजबूत नज़र आता है और साथ में पूरी तरह से मेटल बॉडी वाला फोन भी। वास्तविकता में ऐसा नहीं है। जियोनी मैराथन एम5 प्लस का फ्रेम मेटल वाला है, लेकिन इसके बावजूद हाथों में रखने पर यह मजबूत एहसास देता है। मैराथन एम5 की 8.6 मिलीमीटर की मोटाई की तुलना में यह 8.4 मिलीमीटर स्लिम है। अफसोस की बात यह है कि पतला होने के बावजूद दोनों के वज़न 211 ग्राम ही हैं। अगर शाओमी मी मैक्स (रिव्यू) पर गौर किया जाए तो 6.44 इंच के डिस्प्ले के साथ आने वाले इस फोन का वज़न 203 ग्राम है।

मैराथन एम5 प्लस में 6 इंच का फुल-एचडी (1080×1920 पिक्सल) एमोलेड डिस्प्ले है। इसकी पिक्सल डेनसिटी 480 पीपीआई है जिसका मतलब है कि तस्वीरें और टेक्स्ट काफी शार्प नज़र आएंगी। डिस्प्ले काफी ब्राइट है और कलर प्रोडक्शन भी अच्छे। सूरज की रोशनी में डिस्प्ले पर कुछ पढ़ने में ज्यादा दिक्कत नहीं होती।
 

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 25,000 रुपये की कीमत होने के बावजूद मैराथन एम5 प्लस में कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास या असाही ग्लास प्रोटेक्शन मौजूद नहीं है। फिजिकल होम बटन में फिंगरप्रिंट स्कैनर दिया गया है। फोन को एक हाथ में रखकर इसे इस्तेमाल करना आसान है। फ्रंट कैमरा दायीं तरफ टॉप पर है, ईयरपीस के बगल में।

रियर हिस्से पर प्राइमरी कैमरा और एलईडी फ्लैश मौजूद हैं। नया जियोनी लोगो रियर पैनल के मध्य में है। कंपनी स्पीकर ग्रिल के ऊपर टेक्स्ट जियोनी भी लिखा है, संभवतः कंपनी नए लोगो से अपनी पहचान को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नहीं है। डुअल-सिम ट्रे बायीं तरफ है और माइक्रोएसडी ट्रे दायीं तरफ। एम5 प्लस में दो माइक्रो-सिम मौजूद हैं। यूएसबी टाइप-सी पोर्ट और 3.5 एमएम जैक फोन के निचले हिस्से में है।

कुल मिलाकर, मैराथन एम5 प्लस अपने कई प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में मजबूत होने का एहसास देता है। जिन यूज़र को वीडियो देखना और गेम खेलना पसंद है उन्हें 6 इंच का स्क्रीन पसंद आएगा। कभी-कभार बड़े डिस्प्ले और वज़न के कारण इसे एक हाथ में इस्तेमाल कर पाना आसान नहीं है। हम तो यह भी चाहते हैं कि बैक और रीसेंट बटन बैकलिट हों ताकि उन्हें इस्तेमाल करने में आसानी हो।

स्पेसिफिकेशन और सॉफ्टवेयर
मैराथन एम5 में क्वाड-कोर मीडियाटेक एमटी6735 चिपसेट का इस्तेमाल किया गया है, वहीं मैराथन एम5 प्लस में 1.3 गीगाहर्ट्ज़ क्लॉक स्पीड वाला एमटी6753 प्रोसेसर दिया गया है। इसके साथ मौजूद है 3 जीबी रैम। इनबिल्ट स्टोरेज 64 जीबी है जिसे यूज़र 128 जीबी तक के माइक्रोएसडी कार्ड के जरिए बढ़ा पाएंगे। रैम में मैराथन एम5 की तुलना में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन स्टोरेज बढ़ा दी गई है।
 

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सॉफ्टवेयर की बात करें तो मैराथन एम5 प्लस एंड्रॉयड 5.1 लॉलीपॉप पर आधारित अमिगो 3.1 स्किन पर चलता है। यह काफी पुराना है। हमें मैराथन एम5 प्लस के सॉफ्टवेयर से रूबरू होने में हमें थोड़ा वक्त लगा। कुछ चौंकाने वाले बदलाव किए गए हैं, जैसे कि ड्रॉपडाउन नोटिफिकेशन शेड में टॉगल स्विच का मौजूद नहीं होना। एयरप्लेन मोड, वाई-फाई, सेल्युलर डेटा, ब्लूटूथ, जीपीए, स्क्रीन रोटेशन जैसे फंक्शन के शॉर्टकट तक पहुंचने के लिए यूज़र को हैंडसेट के स्क्रीन पर ऊपरी की तरफ स्वाइप करना होगा।
 

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इसमें जियोनी के कई ऐप पहले से इंस्टॉल होंगे। मैराथन एम5 प्लस में दो होम स्क्रीन मौजूद हैं जिसमें कई तरह के ऐप के आइकन मौजूद हैं। जियोनी ने इस हैंडसेट में यूसी ब्राउज़र का इस्तेमाल किया है, जो काफी साफ-सुथरा है और इस्तेमाल करने में आसान भी। इसमें एक सिस्टम मैनेजर ऐप भी मौजूद है जो रैम क्लीनर, कैशे क्लीनर, ऐप मैनेजर, ऐप फ्रीज़र, पावर मैनेजर और ईको मोड के साथ आता है।

इसमें दो पावर सेविंग मोड भी है। हमें एक्सट्रीम मोड काम का लगा, ख़ासकर जब हमारे फोन की बैटरी रिव्यू के दौरान कम हो गई थी।

परफॉर्मेंस
एंड्रॉयड फोन में सबसे बड़ा बदलाव रैम को लेकर हुआ है। इसकी मदद से मल्टीटास्किंग आसान हो जाता है। ऐसा ही हमें मैराथन एम5 प्लस के साथ देखने को मिला। बैकग्राउंड में करीब दो दर्जन ऐप चलने के बावजूद यह फोन कभी नहीं रुका। हालांकि, हमें यूसी ब्राउज़र ऐप को इस्तेमाल करने में थोड़ी दिक्कत हुई। जीस्टोर और मूड वालपेपर्स ऐप कई बार क्रैश कर गए जो निराशाजनक था। लेकिन रिव्यू के दौरान हैंडेसेट के लिए जो अपडेट रिलीज किया गया उससे ये कमी दूर हो गई।

आम तौर पर मैराथन एम5 प्लस में 1 जीबी रैम फ्री रहता है। भले ही यह पुराने एंड्रॉयड वर्ज़न पर चलता है, लेकिन अमिगो यूआई कस्टमाइजेशन की मदद से आप उन ऐप पर नज़र रख पाएंगे जो डेटा और अन्य रीसोर्स की खपत कर रहे हैं।

गेमिंग की बात करें तो एम5 प्लस ने आसानी से हैवी ग्राफिक्स वाले गेम को चलाया। कॉल क्वालिटी भी अच्छी थी। होम स्क्रीन पर मौजूद फिंगरप्रिंट रीडर ने भी अच्छा रिस्पॉन्स दिया। एक बात ध्यान रखें कि अगर आपकी ऊंगलियां गीली हैं तो यह फिंगरप्रिंट स्कैनर नहीं काम करेगा।

जियोनी मैराथन एम5 प्लस के बेंचमार्क आंकड़े बेहद शानदार नहीं थे। कुल मिलाकर, मैराथन एम5 प्लस की परफॉर्मेंस को ठीक-ठाक कहा जा सकता है। लेकिन कीमत को देखते हुए हमें और बेहतर नतीजों को उम्मीद थी। कई बार कुछ ऐप के शुरू होने में थोड़ा वक्त लगता है जो परेशान करता है। यह कीमत को कहीं से भी सही नहीं ठहराता।
 

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जियोनी मैराथन एम5 प्लस में 13 मेगापिक्सल का ऑटोफोकस रियर कैमरा है और इसके साथ 5 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा मौजूद है। कैमरा ऐप तेजी से काम करता है। यूज़र के तौर पर आपके पास कैमरा ऐप में कई फ़ीचर मौजूद रहेंगे। अफसोस इस बात का है कि फोन में मैराथन एम5 की तरह प्रो मोड नहीं दिया गया है।

रियर कैमरे ने अच्छी तस्वीरें लीं, ख़ासकर कलर के लिहाज से। हालांकि, भरपूर रोशनी की स्थिति में ओवर-सेचुरेशन की दिक्कत आई। आउटडोर शॉट्स फोन के स्क्रीन पर तो अच्छे लगे, लेकिन उन्हें ज़ूम इन करने पर डीटेल की कमी साफ नज़र आई।
 

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5 मेगापिक्सल के फ्रंट कैमरे से उपयुक्त रोशनी में हम ठीक-ठाक तस्वीरें लेने में सक्षम रहे। कम रोशनी में ली गई तस्वीरों में नॉयज की मात्रा ज्यादा थी। हम चाहते हैं कि इसके कैमरे में स्लो मोशन वीडियो कैपचर करने की क्षमता हो। लेकिन इसके लिए सपोर्ट मौजूद नहीं है।

बैटरी लाइफ
बैटरी लाइफ टेस्ट में मैराथन एम5 प्लस कंपनी के पुराने हैंडसेट मैराथन एम4 को तो हराने में कामयाब रहा, लेकिन ज्यादा बड़ी बैटरी वाले मैराथन एम5 से पिछड़ गया। इसकी 5020 एमएएच की बैटरी हमारे वीडियो लूप टेस्ट में 21 घंटे और 52 मिनट तक चली। आम इस्तेमाल में फोन की बैटरी बिना रीचार्ज किए करीब तीन दिन तक चली।  
 

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फोन में एक यूएसबी टाइप-सी पोर्ट है और इसे एम5 की तुलना में ज्यादा तेजी से चार्ज करना संभव है। हैंडसेट की बैटरी को शून्य से 100 फीसदी तक चार्ज करने में करीब 3 घंटे लगे जो बड़ी बैटरी को देखते हुए सही नज़र आता है।

हमारा फैसला
26,999 रुपये का जियोनी मैराथन एम5 प्लस हर हाल में मैराथन एम5 (रिव्यू) से बेहतर है, भले ही इसमें छोटी बैटरी है। हालांकि, कीमत ज़्यादा नज़र आती है, लेकिन कंज्यूमर फिंगरप्रिंट सेंसर और यूएसबी टाइप सी पोर्ट के लिए अपनी जेबें और ढीली करने को तैयार हैं।

अगर बैटरी लाइफ की बात करें तो मैराथन एम5 प्लस अपने प्राइस रेंज के दूसरे फोन को आसानी से हराने में कामयाब होता है। इस फोन की सबसे अहम ख़ासियत बैटरी लाइफ ही है। संपूर्ण अनुभव को ध्यान में रखा जाए तो मैराथन एम5 प्लस अपने प्राइस रेंज के वनप्लस 3 (रिव्यू) और शाओमी मी 5 (रिव्यू) जैसे लोकप्रिय फोन को चुनौती देने में सक्षम नहीं नज़र आता है।


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